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रेलवे के निजीकरण के खिलाफ जनआन्दोलन का आगाज

WCREU के महामंत्री काॅमरेड मुकेश गालव प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुये

रेलवे के निजीकरण के खिलाफ जनआन्दोलन का आगाज
कोटा 11 सितम्बर। केन्द्र सरकार ने रेलवे के निजीकरण का ऐलान करते हुए 109 रूट पर 151 ट्रेनों के परिचालन को निजी हाथों में देने का फैसला किया है इसके साथ ही 50 स्टेशनो को भी निजी हाथों में देने की घोषणा की है और रेलवे में 100 प्रतिशत एफडीआई का ऐलान करते हुए विभिन्न उत्पादक ईकाइयों को भी निजी हाथों में देने जा रही है। वर्षाे से आम जनता के टैक्स व रेल मजदूरों की मेहनत से पूरे देश में रेलवे का इतना बड़ा आधारभूत ढांचा तैयार हुआ है जिसका उदेश्य था जनता की सेवा करना इतने बडे उद्योग को सरकार सेवा की बजाय मुनाफे के बाजार में बदल रही है। आज रेलवे देश का सबसे बडा रोजगार देने वाला संस्थान है जिसके लगभग 13 लाख कर्मचारी है लगभग 2.5 करोड़ लोग रोजाना यात्रा करते है भारतीय रेल विश्व का सबसे सस्ता परिवहन का साधन है सबसे सस्ता होने के बावजूद रेलवे आज भी मुनाफे में चलने वाला उद्योग है परंतु केन्द्र सरकार चन्द पूंजीपतीयों के हित में देश की जनता के इस उद्योग का निजीकरण करने जा रही है।
वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एम्पलाईज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि रेलवे के निजीकरण होने से समाज के सभी वर्गों पर दुष्परिणाम आयेगे, देश के युवाओं के रोजगार के अवसर समाप्त हो जायेगें, देश के युवाओं को कम वेतन पर निजी कम्पनियों एवं मालिकों के पास उनकी शर्तों पर काम करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा, वरिष्ठ नागरिकों को किराये में मिलने वाली रियायत बन्द हो जायेगी, महिलाओं को मिलने वाली रियायत बन्द हो जायेगी, दिव्यांगों को मिलने वाली रियायत बन्द हो जायेगी, कैंसर एवं गंभीर बिमारी पर मिलने वाली रियायत बन्द हो जायेगी, दैनिक यात्री, स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, बुद्धिजीवि वर्ग को मिलने वाली रियायत छीन ली जायेगी, छात्र-छात्राओं को मिलने वाली रियायत बन्द हो जायेगी, जनता की सुविधा अनुसार गाड़ियों को ठहराव बन्द हो जायेगा, माल ढुलाई की कीमत मनमानी वसूल की जायेगी जिसका भार देश की गरीब जनता पर पड़ेगा, परिक्षा में जाने के लिये निःशुल्क पास की सुविधा समाप्त होगी।
आज रेलवे जो दुनिया का सबसे सस्ता परिवहन है निजीकरण के बाद निजी मालिक आम जनता से मनमाना किराया वसूल करेगें। केन्द्र सरकार द्वारा रेल कर्मचारी की महनत वे आम जनता के पैसे से निर्मित इस उद्योग को निजी हाथों में देकर तबाह करने की साजिश के खिलाफ एक सशक्त जुझारू जन आंदोलन समय की मांग है
आॅल इण्डिया रेलवेमैन्स फैडरेशन के आव्हान पर वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एम्पलाईज यूनियन द्वारा दिनांक 14 सितम्बर से 19 सितम्बर 2020 तक समाज के सभी वर्गो को रेलवे के निजीकरण से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर दिनांक 19 सितम्बर 2020 से जनआन्दोलन का आगाज किया जायेगा। जिसमें दिनांक दिनांक 14.09.2020 को कोटा मंडल की सभी शाखाओं के डेलीगेट, युवा, महिला, एवं कार्यसमिति की बैठक बुलाकर जनआन्दोलन की तैयारी पर मंथन किया जायेगा। दिनांक 15.09.2020 को सभी शाखायें अपने अपने कार्यस्थल पर गेट मीटिंग आयोजित कर रेलवे निजीकरण के विरोध में जन आन्दोलन करने हेतु नारेबाजी करेगें। दिनांक 16.09.2020 को जनआन्दोलन के लिये व्यापारी, युवा, विद्यार्थी, महिला, पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिक, दैनिक यात्री, श्रमिक वर्ग, खिलाडी, कलाकार, पत्रकार एवं मीडिया कर्मी, बुद्धिजीवि वर्ग, प्रोफेसर, जज, एडवोकेट, डाक्टर, एनजीओ एवं जन समितियां, रेलकर्मी, राजनैतिक दल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग से जनसम्पर्क कर रेलवे के निजीकरण होने के दुष्परिणामों से अवगत करवाया जायेगा। दिनांक 17.09.2020 को विशाल मोटरसाईकिल रैली निकाली जायेगी जो रेलवे स्टेशन से सामने से प्रारंभ होकर नयापुरा से वापसी आयेगी। दिनांक 18.09.2020 को रेलवे काॅलोनी में रात्रि 7.30 बजे मशाल जुलूस निकाला जायेगा जो कि ऋणमुक्तेश्वर मन्दिर रेलवे काॅलोनी से प्रारंभ होकर समस्त रेलवे काॅलोनियों में निकाला जायेगा एवं दिनांक 19.09.2020 को प्रातः 11.30 बजे सभी कर्मचारी एवं अन्य सभी वर्गों के लोग सर्कूलेटिंग एरिया कोटा स्टेशन पर एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन तथा समस्त रेलकर्मचारी तथा आम जनता रात्रि 08 बजे से 08.10 तक अपने मकानों की लाईटें बन्द कर ब्लैक आउट करेगें। इन सभी कार्यक्रमों में कोरोना एडवाईजरी कमेटी के सभी निर्देशों का पालन एवं सोशल डिस्टेन्सिंग की पालना की जायेगी।

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